
चलो गाओ री सखी,
महादेवी की कहानी,
फर्रुखाबाद में जन्मी,
दुःखों की चिर-रागिनी।
उन्नीस सौ सात का,
वो शुभ दिन आया,
हेमरानी और गोविंद ने,
बेटिया को था पाया।
संस्कार मिले घर से,
शिक्षा का उजियारा,
संस्कृत पढ़कर,
साहित्य सजाया सारा।
छोटी उम्र में ब्याही,
पर मन न बंधाया,
साधना के पथ पर,
जीवन सारा लगाया।
चलो गाओ री सखी,
महादेवी की कहानी,
फर्रुखाबाद में जन्मी,
दुःखों की चिर-रागिनी।
‘नीर भरी दुःख की बदली’
उनका गीत बना,
छायावाद की वो शक्ति,
वो सच्ची मीना।
‘यामा’, ‘दीपशिखा’ से,
दीप ज्ञान का जलाया,
‘पथ के साथी’ में,
संस्मरणों को सजाया।
नारी शिक्षा कीअलख जगाई,
कर्मठ थीं वो
प्रयाग महिला विद्यापीठ की,
आधार बनीं वो।
चलो गाओ री सखी,
महादेवी की कहानी,
फर्रुखाबाद में जन्मी,
दुःखों की चिर-रागिनी।
विरह वेदना शक्ति से,
गीतों का श्रृंगार किया,
बुद्ध के दर्शन करके ,
मन अपने को शांत किया।
ज्ञानपीठ मिला पुरस्कार मिला,
पद्म भूषण से मान बढ़ा,
साहित्य गगन में उनका नाम,
अमर अमरदीप परवान चढ़ा।
ग्यारह सितंबर,अस्सी-सात को,
गहरी नींद में सो गईं,
पीड़ा-रागिनी, अमर लेखनी,
बीच हमारे छोड़ गईं।
चलो गाओ री सखी,
महादेवी की कहानी,
फर्रुखाबाद में जन्मी,
दुःखों की चिर-रागिनी।
रीना पटले (शिक्षिका)
शास.हाई स्कूल ऐरमा(कुरई)
सिवनी (मध्य प्रदेश)













