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पंचदिवसीय दीपावली

१. धनतेरस
धनतेरस का शुभ दिन आया, मंगल दीप जलाएँ,
स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के, गीत सभी गाएँ।
धनतेरस का दिन देता हमें, खुशियों की सौगात,
धन्वंतरि के नाम से दीप जलेगा, आज की रात।

२. नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली
नरक चतुर्दशी का दिन आया, दीप जलाने का,
मन का अंधेरा मिटाकर, सच्चे पथ पर जाने का।
काम-क्रोध, लोभ-मोह त्याग, प्रेम बढ़ाने का,
श्रीकृष्ण का नाम लेकर, जीवन को सजाने का।

३. मुख्य दिवाली / लक्ष्मी पूजा
श्री रामचंद्र जब लौटे, अयोध्या नगर की ओर,
दीप जल उठे सब द्वार, छा गया सुख का सागर।
लक्ष्मी माता करें आशीष, धन-वैभव का संचार,
सुख-शांति में भरे घर, मन में प्यार का विचार।

४. गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा कहे, जब धरती माँ की बात,
प्रकृति की सेवा करो, यही है सच्ची सौगात।
इन्द्र के घमंड से बचा, जब गोपाल का मान,
तब सीखा संसार ने, सेवा में ही है भगवान।

५. भाई दूज
भाई दूज का दिन लाए, रिश्तों में मिठास,
बहन करे आरती, भाई देता है नित विश्वास।
प्रेम-स्नेह की किरण से, जग में फैले प्रकाश,
ऐसे पावन बंधन को, मिले अमर उल्लास।

पाँच दिनों की दीपावली, पाँच दीपक हैं खास,
सुख-संतोष, सदाचार, प्रेम, सेवा और विश्वास।
हर दिन हमें सिखाता है — मन को रखो उजास,
दीप जलाओ अंतर्मन में, यही जीवन का प्रकाश।

स्नेह, सहयोग और विश्वास का दीप बनाये महान,
सफलता और प्रगति से नित मिले आपको सम्मान।
शांति, संतोष और समृद्धि के लिए करता हूँ दुआएं,
दीपावली के पर्व की आपको हार्दिक शुभकामनाएं।

योगेश गहतोड़ी “यश”
नई दिल्ली – 110059

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