
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास है,
वो मेरा लौटा दो…
वो मेरे साथ चलना,
मुस्की-मुस्की मुस्काना ,
मेरे कंधे पर सिर रखकर
चुपचाप से सो जाना —
वो मेरा लौटा दो…
जब पहली बार हम मिले थे,
मेरे नैनों की वो झिलमिल बात,
वो पहली झलक, वो पहली सौगात —
वो मेरा लौटा दो…
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास है,
वो मेरा लौटा दो…
मेरी यादों की धुंधलाहट ,
वो मस्ती, वो मुस्कुराहट ,
अनकहा सा सच,
साथ बिताए वो पल,
बरसात की वो राते —
वो सब मेरा लौटा दो…
वो आधी-अधूरी प्यासें ,
वो बसस्टैंड की बातें,
वो गीली हँसी में भीगे जज़्बात —
वो सब मेरा लौटा दो…
वो पहली मुलाक़ातें,
गुमसुम, चुपचाप निगाहों के मिलाप ,
वो चांदनी-सी रातें,
मेरे जज़्बातों की बातें,
नैनीताल की ठंडी सड़कों पर
तेरी साँसों की ठंडी छाँव —
वो सब मेरा लौटा दो…
मेरी यादों का हर टुकड़ा-टुकड़ा
तुम्हारे पास ही रह गया है।
कुछ गुदगुदाती ख्वाब ,
उड़न-छू बाली कहानियाँ,
कुछ ग़ज़ल, कुछ रूबाइयां,
मेरी आंचल की परछाई…
कसमें, वादे,
मेरा तुझ पर अटूट विश्वास —
वो सब मेरा लौटा दो…
आर एस लॉस्टम













