
प्यार का क्षितिज
धरती आसमान जहां मिलते हैं,
क्षितिज वही कहलाता है।
प्यार की पूर्णता का परिचायक
क्षितिज, सबको कहां मिल पाता है???
प्यार में कैसा क्षितिज??
प्यार की अपूर्णता ही,शाश्वत
प्यार होता है!!
प्यार जब अपूर्ण होता है,हर
रोज मनुज उसे खोजता है।
हर उम्र में,टुकड़ों टुकड़ों में,
मिला प्यार, उसके दिल में बसा रहता है।
आधा चांद,आधा प्यार, आधी रात,
मन में सदैव रहती है अपने साथ
यह प्यार की आधी बात!!!!













