
जी हां ,मैं तुलसी माता हूं
सबके घर -आंगन की शोभा हूं
असीम सुख और समृद्धि का आशीष देती हूं
जिस घर में मेरा सम्मान है होता
उसको कभी ना छोड़ पाना होता
मेरे आशीष से फलते- फूलते
पत्ता -पत्ता अमृत का सार है
मैं घर में वृंदावन की पवित्रता गढ़ती हूं
मैं नन्हा पौधा तुलसी वट वृक्ष बन जाती हूं
मैं हर दर्द को हरने वाला वो वैद्य बन जाती हूं
मंजरियों से लदा, मेरा तन सुकोमल
हर रोग के आगे दवा बनकर
संजीवनी का काम करती हूं
सभी डालते हैं मुझ में प्रतिदिन एक लोटा जल
अर्पित जल से मैं हरी- भरी हो जाती हूं
मेरा वजूद जिंदा हो जाता है
मैं हर घर आंगन,उपवन में उग जाती हूं
मुझ में गुण है हजार
मेरी महिमा अपरंपार
मैं जहां भी रहती हूं
वातावरण को शुद्ध रखती हूं
मेरे पत्ते से ही लगता है नारायण
को भोग
है आयुर्वेद में मेरा ही गुणगान
मैं मां -सी दुआएं सभी प्राणियों को
देती रहती हूं
मैं सब की प्यारी, दुलारी माता तुलसी
हूं
श्री राम, कृष्ण और बजरंगबली की
भोग में निश्चित रूप से रहती हूं
मेरे बिना भोग नहीं लगती
मैं तुलसी हूं तेरे आंगन की
डॉ मीना कुमारी परिहार













