
इक धुंधली सी तस्वीर है,
यादों की गहराइयों में कहीं.
रंग फीके पड़ गए हैं अब,
पर दर्द नया सा लगता यहीं.
पलकों पे ठहरा इक आँसू,
कहता अनकही सी दास्तान.
खुशी के लम्हे गुमशुदा,
बस बाकी है इक खाली मकान.
तस्वीर ये तुम्हारी बेज़ुबान,
हज़ारों बातें कहती है.
गुज़रे लम्हों की आहट,
मेरे दिल में रहती है.
वो हँसी जो कभी गूँजती थी,
खामोशी में बदल गई अब.
अधूरी सी लगती कहानी,
कौन समझेगा इस दर्द को कब?
हर एक लकीर में तुम्हारी,
छिपी है कोई गहरी बात.
तन्हाई का साथी बन गई,
तस्वीर ये तुम्हारी आज ।
काश लौट आते वो दिन फिर,
काश मिट जाता ये सन्नाटा.
पर बस बची है इक तस्वीर,
और दिल का ये टूटा नाता।
तस्वीर ये तुम्हारी बेज़ुबान,
हज़ारों बातें कहती है.
गुज़रे लम्हों की आहट,
मेरे दिल में रहती है।
रीना पटले/(शिक्षिका)
शास हाई स्कूल ऐरमा (कुरई)
जिला - सिवनी (मध्यप्रदेश)













