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बचपन की यादें


शीर्षक – मेरा वो बचपन

बचपन में न फीकर न टेंशन थी,
बस सुबह की मस्ती और शाम की बस्ती थी।

था कारवां महफ़िल यारों की,
थी वो गलियां साईकिल पे सवारी थी,
वो पतंग जो होंसलों से भारी थी,
वो बचपन की गहरी यादों में थी।

वो मासुमियत बचपन की चेहरे पर,
वो मस्ती की चमक खेलों के मैदानों पर,
वो दादी की लोरिया जुबानों पर,
वो एक प्यारी सी नींद मेरी आंखों तक।

बचपन वो मिट्टी है जिसमें,
मुझको वो आकार मिला,
वो मूल्यों का उचित सामंजस्य,
मेरे व्यवहारों में दिखा।

बचपन वो खिलौना जिसका हर रंग प्यारा है,
सद्भावना और समर्पण सबसे मूल्य प्यारा है,
बचपन की ही नींव है सारी,
उस पर जीवन तेरा है।

हंसी खुशी का बचपन मेरा हर पल मुस्कराता था,
न भेद भाव का ज्ञान न अमीरी-गरीबी का रंग था,
बचपन बहुत सुंदर हे सादगी,
दिल की जुबान की अपनों की।

लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश

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