Uncategorized
Trending

मैं सड़क हूँ

हाल सुनिएगा बालसी रोड सरायपाली

चलते हैं मुझ पर सब,
पर कोई न पहचाने दर्द मेरा।

धूप में झुलसूँ, बारिश में गलूँ,
पर कोई न पूछे हाल मेरा।

मैं सड़क हूँ…
हाँ, वही सड़क — जिस पर तुम रोज़ चलते हो,
पर कभी पलटकर नहीं देखते कि मैं कैसी हूँ।
हर मौसम में बस निभाती हूँ — अपनी जिम्मेदारी।

गड्ढों में छिपा है मेरा दर्द,
धूल में लिपटी है मेरी कहानी।
कभी किसी ने पूछा ही नहीं —
कि क्यों टूटी हूँ मैं, क्यों हूँ मैं वीरानी।

हर चुनाव में करते हो बड़े-बड़े वादे,
“सड़कें बनाएँगे, सुधार लाएँगे!”
पर वादे बस वादे रह जाते हैं,
और मैं — फिर वही टूटी हालत में रह जाती हूँ।

बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ दौड़ती मुझ पर,
पर कोई न रुके मरहम लेकर।

थकती हूँ, टूटती हूँ हर मोड़ पर,
फिर भी संभालती हूँ हर सफर।

मैं कहाँ तक थक चुकी हूँ इस भार से।

ना कोई मरहम, ना कोई सहारा,
मैं सड़क हूँ — पर कौन है मेरा प्यारा!

कभी सोचो…
अगर मैं न रहूँ तो, कैसे पहुँचोगे मंज़िल तक?
कैसे जुड़ेगा हर गांव, गाँव से शहर तक

मैं सड़क हूँ,
सिर्फ़ रास्ता नहीं — तुम्हारी तरक्की की नींव हूँ।

स्वरचित
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखंड सरायपाली

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *