
सुखद प्यारी लम्हों में सिमटी है जिंदगी
तुम्हारे संग बिताए तुम लम्हों को कैसे भूल सकती हूं
कैसे भूल जाऊं उस प्यारी लम्हों को
वो तेरे संग-संग रहना और तेरी प्यारी बातों में डूब जाना
एक सुखद एहसास का अनुभूति कराना
वो चांदनी रातें और टिमटिमाते तारे
बांहों में बांहें डाले
प्यार का इजहार करना, सात जन्मों के रिश्ते को निभाने की कसमें
मुझे वो लम्हें बार-बार याद आ रहे हैं
वो मधुर मुस्कान, मीठी प्यार की बातें
वो रातें जो तुम्हारी बाहों में हमने गुजारी
वो यादगार लम्हें अनमोल पल
वो तुझसे मिलना अपनी जज्बातों को
तुम्हारे सामने व्यक्त करना
काश वो लम्हे फिर से मेरी जिंदगी में आ जाते
जिसे फुर्सत से हमने कभी बिताया था
भूलाना भी चाहूं तो ना भूल पाऊंगी
ये लम्हों में सिमटी हमारी जिंदगी की
अमिट कहानी है
ये अमिट कहानी, जिंदगी की सुखद यादें
आज भी मुझे रोमांचित कर देती है हैं
डॉ मीना कुमारी परिहार













