
दिल्ली का दिल दहला जब,गूँजी दहशत की आवाज़,
ज़ख्मी हुई राजधानी,रोया हर एक समाज।
मासूमों का लहू बहा,मिट गए कितने सपने,
आतंक के साए में,सहम गए अपने।
बाज़ार हुए खामोश,सड़कें हैं वीरान,
हर आँख में आँसू है,हर दिल में तूफ़ान।
डर को अब हटाना है,हिम्मत से लड़ना है,
हर ज़ुल्म का जवाब,मिलकर हमें देना है।
वीरों ने दी कुर्बानी,देश का मान रखा,
उनकी शहादत को,कभी न भूला जा सका।
उनका बलिदान हमें,देता है ये पैगाम,
न डरना,न झुकना,यही है असली काम।
हम फिर से खड़े होंगे,हौसला न टूटेगा,
आतंकवाद का अँधेरा,अब ज़रूर छूटेगा।
रीना पटले (शिक्षिका)
सिवनी (मध्यप्रदेश)












