
एक अनुभूति। ।
मिट्टी का खिलौना तू है
तुझे मिट्टी में फिर मिलना है।2
क्यों करता दिल्लगी दुनिया से
तुझे मिट्टी में फिर मिलना है ।।2
जो कुछ सच है तेरे सामने
यह फरेब एक धोखा है।
जो दिखता वह झूठा पगले
ना दिखता वह सच्चा है ।।
क्यों करता दिल्लगी दुनिया से,,1
क्यों फिरता है मारा मारा
हाथों में कुछ ना मिलना है
जो भी बना मिट्टी का खिलौना,
उसे मिट्टी में फिर मिलना है।।
क्यों करता दिल्लगी दुनिया से,,2
सच तो ये है प्यारे पगले
मिट्टी से कुछ ना मिलना है।
जो करता है प्यार प्रभु से
उसी का जीना, जीना है।।
क्यों करता दिल्लगी दुनिया से,,3
मिट्टी का खिलौना तू है
तुझे मिट्टी में फिर मिलना है।2
क्यों करता दिल्लगी दुनिया से
तुझे मिट्टी में फिर मिलना है।।2
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश












