
मतलबों में छुपे
मतलबी लोगों की
मतलब का आलम मत पूछ
हर शब्द के पीछे
एक चाह छुपी रहती है,
हर मुस्कान में
कोई ना कोई वजह बहती है।
ये दुनिया वही है
जहाँ रिश्ता भी तभी बनता है,
जब दिल का नहीं
फायदे का तराज़ू संतुलन दिखता है।
मतलबों के इस मेले में
खुद को बचाए रखना,
हर हाथ बढ़े तो
दोस्ती समझकर पास मत जाना।
यहाँ लोग बदलते हैं
वक्त की तरह,
और अपने मतलब निकलते ही
चेहरे की तरह रंग बदलते हैं।
आर एस लॉस्टम












