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हर ज़रूरत से पहले

तुमसे मोहब्बत है मुझे हर इक वजह से पहले,
तुम मेरी ज़रूरत हो हर इक ज़रूरत से पहले।

दीवानगी क्या चीज़ है, ये लोग क्या जानेंगे,
मैंने तुम्हें चाहा है हर एक हद से पहले।

न रांझा की सी तड़प कम है, न मजनूं से कम हूँ मैं,
तुमको ही माँगा है सदा हर इक सूरत से पहले।

मैंने तो चाहा है तुम्हें रूह की गहराई से,
जैसे कृष्ण ने राधा को हर इबादत से पहले।

तुम्हारी फ़िक्र भी है मुझे ख़ामोश दुआ की तरह,
जैसे शिव ने विष पी लिया दुनिया से पहले।

खो दूँ न तुमको ये डर हर पल रहता है दिल में,
इसलिए तुम्हारा होना है मुझे हर आफ़त से पहले।

तुम बिन तो बस साँस चलेगी, ज़िंदगी ना होगी,
तुम नाम हो मेरा हर इक पहचान से पहले।

अब “लॉस्टम” भी कहता है ये दुनिया के सामने,
तू ही मेरा सब कुछ है हर इक चाहत से पहले।

आर एस लॉस्टम

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