
मन्नू रिश्तों के दर्पण में देख जरा,
मै और हम तराज़ू पर तोल जरा।
अपने अंहकार को दूर कर जरा,
दिल से यूं मीठी वाणी बोल जरा।।
ईर्ष्या व द्वेष को दुर करे हम,
ना छोटे बड़े में भेद करे हम।
तूफ़ानों से मिलकर लडे़ हम,
सदा अपनों के साथ चले हम।।
चाहे सावन सी बरखा़ हो,
चाहे गर्मी की तेज तपन हो।
दिल में उठता प्यार का सागर हो,
बस जीवनभर हमारा साथ हो।।
प्यार की नित अमरबेल बढे़,
बगिया में यूं नव पुष्प खिलें।
सुख दुःख के हम साथी बने,
कदमों से कदम मिलाकर चलें।।
मर्यादा का सदा मान रखे हम,
प्रेम, त्याग से यूं काम करे हम।
हाथों में लेकर हाथ चले हम,
जीवन पथ पर साथ बढे हम ।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












