Uncategorized
Trending

हिन्दी की महिमा

१.
हिंदी केवल शब्द नहीं — यह हृदय की धड़कन है,
मिट्टी की सौंधी खुशबू, आत्मा की पहली झनकार है।
जब कोई “माँ” कहता है — वहाँ हिंदी ही बसती है,
यह भाषा नहीं — प्रेम का शाश्वत आधार है।

२.
समय की नदी बहती रही, शब्द बदलते जाते रहे,
पर हिंदी ने हर पीढ़ी के संग, अपना घर बसाया है।
सूर, कबीर, तुलसी की वाणी में इसका रूप खिला है,
हिंदी ने भावों की चिंगारी को दीपक सा जलाया है।

३.
बचपन की पहली बोली, पहली मुस्कान हिंदी,
गुड़िया की बातों में गुँथा मासूम मन हिंदी।
माँ की थपकी में लोरी के शब्द हिंदी,
उसी पल जीवन का पहला स्पंदन हिंदी।

४.
यह भाषा नहीं — आत्मा का आईना है,
जो जोड़ती है दिलों को, परंपराओं का खजाना है।
हर शब्द में रिश्तों की गर्माहट है, अपनापन है,
हिंदी तो वह पुल है — जहाँ हम सब एक-साथ खड़े हैं।

५.
जब कोई कहता है — “नमस्ते”,
तो केवल शब्द नहीं, संस्कृति झुकती है।
“धन्यवाद” में सिर्फ आभार नहीं,
बल्कि आत्मीयता की गरिमा मिलती है।

६.
हिंदी ने हमको सिखाया —
शब्दों को अर्थ नहीं, भावों से पढ़ना,
मन को सीप बना, अनुभवों के मोती सँजोना,
और मानवता को प्रेम की भाषा में ढलना।

७.
आज दुनिया बदल रही, भाषा भी डिजिटल हो रही,
पर हिंदी पीछे नहीं — वह हर मंच पर खिल रही।
मोबाइल के अक्षरों में भी उसका स्पर्श मिलता है,
हिंदी हर युग में नई ऊर्जा बनकर मिलती है।

८.
कुछ लोग शर्माते हैं इसे बोलने में,
मानो यह आभूषण नहीं, बोझ हो कोई।
पर सत्य यह है — जो अपनी जड़ों से कट जाता है,
वह फिर चाहे जहाँ जाए — अधूरा ही रहता है कोई।

९.
हिंदी वह आईना है — जिसमें भारत की आत्मा दिखती है,
उसकी परंपरा, संस्कृति और पहचान सजी रहती है।
जो हिंदी से दूर हुआ, वह स्वभाव से दूर हुआ,
हिंदी से प्रेम करने वाला — भारत से प्रेम करता है।

१०.
आओ — दिल से प्रण लें,
हिंदी को केवल बोलें नहीं — महसूस करें।
इसे सम्मान दें, इसे जीवित रखें, इसे आगे बढ़ाएँ —
क्योंकि हिंदी हम नहीं बोलते — हिंदी हम हैं।

योगेश गहतोड़ी “यश”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *