
समय चलायमान है।
स्वभाव है उसका अनवरत चलना।
तब होता है स्थितियों का बदलना, परिवर्तन होता है, दिशा कौन तय करता है यह होता है समझना।
बलवान समय हमें परखता है।
भली और बुरी दोनों दिशाएं वह दिखाता है।
हमें लुभाता है, स्वयं हंसता है।
मानव अपनी बुद्धि और कर्म अनुसार
अपने चलने की दिशा तय करता है।
जिस भी दिशा का पथ मानव चुनता है,
तदनुरूप फल पाता है।
परिवर्तन अवश्यम्भावी है,
धीमान सुख दुख की चिंता किए बिना
उचित पथ चुनता है।
अपनी सही मंज़िल पाता है।
सुलेखा चटर्जी












