
भारत की नारी प्रेम की धारा,
ममता जिसकी प्राणों से प्यारी।
संस्कारों की वह है रखवाली,
धरती पर ईश्वर की लाली।
कभी माँ बनकर करुणा बरसाती,
कभी बहन बन साथ निभाती।
कभी बेटी बन आशा जगाती,
कभी बहू बन संस्कार सजाती।
गर्गी-मैत्रेयी ज्ञान की निशानी,
वेदों में अंकित उनकी कहानी।
बुद्धि-तर्क का दीप जलाती,
विश्व को शिक्षा मार्ग दिखाती।
सीता की मर्यादा सबसे न्यारी,
द्रौपदी न्याय की शक्ति धारी।
मीरा ने भक्ति में जीवन ढाला,
प्रेम और समर्पण का दीप उजाला।
झाँसी की रानी रण में दहाड़ी,
दुर्गावती ने वीरता बढ़ाई।
हजरत महल अडिग खड़ी रही,
स्वाधीनता की लौ जलती रही।
सावित्री बाई शिक्षा की ज्योति,
अज्ञानता पर लिखी क्रांति।
विद्यालयों का द्वार खुलवाया,
नारी शिक्षा को अधिकार दिलाया।
लता दीदी सुरों की महारानी,
आशा भोसले ने पहचान बनाई।
कला-संगीत में चमकी संस्कृति,
भारत की विरासत में अंकित सच्ची।
जब ऊषा सी तेज़ हवा में दौड़ी,
सिंधु-सायना आसमान में चमकी।
मेरी कॉम ने मुक्कों में साहस भरा,
खेलों में भारत का नाम उभरा।
कल्पना चावला नभ में समाई,
सुनिता ने अंतरिक्ष पर पहचान बनाई।
विज्ञान के क्षेत्र में चमकी क्षमता,
भारत की नारी ने बदली दिशा।
इंदिरा गांधी नेतृत्व की पहचान,
द्रौपदी मुर्मू ने बढ़ाया सम्मान।
राजनीति में नारी अग्रसर हुई,
विश्व मंच पर भारत की नारी गई।
आज की नारी सक्षम और प्यारी,
हर क्षेत्र में उसकी भागीदारी।
घर-समाज और जग में चमकी,
संघर्षों में भी अडिग दमकती।
नमन नारी शक्ति को प्यारी,
जो हँसकर हर पीड़ा सहती सारी।
घर-समाज और जगत संभाले,
भारत का गौरव बनकर उजाले।
नारी ही नवदुर्गा रूप में पूजी जाती है,
नारी से ही मानव जीवन मिलता है।
नमन करता हूँ भारत की हर नारी को,
वंदन है माँ, बहन, बहू और बेटी को।
योगेश गहतोड़ी “यश”












