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संविधान


विधा- कविता
शीर्षक- संविधान दिवस

मैं भारत देश का संविधान हूँ,
सबको राह दिखाता हूँ l
पथ की सारी बारीकी को,
गहनता से सिखलाता हूँ ll

उलझे न भारत का कोई,
सबको मार्ग दिखाता हूँ।
रातों के अंधकार में भी,
रोशनी बनकर ज्ञान का प्रकाश फैलता हूँ ।

सभी के हितों की रक्षा,
मेरा पहला विधान है।
गरीब और अमीर सभी को,
देता एक जैसा सम्मान हूँ।

मौलिक अधिकारों की बाते,
मुझ में साफ बताई गई हैं।
कर्तव्यों का ज्ञान मैं देता,
सबकी इसमें भलाई है।।

डाँ. बाबा साहेब ने,
मुझे रचाया है।
स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य का,
सपना सफल कर दिखाया है।।

भारत का संविधान,
एक अनमोल धरोहर है।
इसकी रखा करना हम सबका,
सबसे बड़ा कर्तव्य है।।

रचनाकार- नंदकिशोर गौतम
(माध्य. शिक्षक) शास. उच्च. माध्य. विद्यालय बकोडी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी (म. प्र.)

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