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नारी (श्रृंगार और संघर्ष)

कौन कहता है कि सिर्फ
श्रृंगार से ही सजती है नारियां ।
चमकता पसीना माथे पर,
उसके तो दमकती हैं नारियां।।

कहलाई कोमलांगी पर,
संघर्ष ही चुना हमेशा।
जनक दुलारी सिया ने,
भी यह आदर्श परोसा।।

नारी संघर्ष की कहानी से
इतिहास भरा पड़ा ।
महारानी लक्ष्मी बाई ने,
भी इसे खुद के माथे मढ़ा।।

आज की नारी भी कहां,
संघर्ष से घबराती हैं।
सजती संवरती खुद से,
आत्मविश्वास से हर काम निभाती हैं।।

उर्मिला ढौंडियाल ‘उर्मि’
देहरादून (उत्तराखंड)

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