
लहराऍं तिरंगा ,
मनाऍं गणतंत्र ।
पूरी है आजादी ,
पूर्णतः स्वतंत्र ।।
अपना है राष्ट्र ,
अपना है तंत्र ।
अपने सब लोग ,
अपना यह मंत्र।।
अपने सारे लोग ,
मत बन विद्रोही ।
आरोही बना नहीं ,
बना है अवरोही ।।
आजाद हुए हम ,
आजाद विधान ।
आजाद है ध्वज ,
आजाद संविधान ।।
विशेष है पहचान ,
विशेष है अरमान ।
चल पड़े नेकी पथ ,
विश्वबन्धुत्व पयान ।।
गुणों की खान यह ,
कितने हों बखान ।
चाह न बुराई का ,
अलग है पहचान ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
डुमरी अड्डा
छपरा ( सारण )
बिहार ।












