
शिवशंकर दूल्हा बनकर हुए हैं तैयार ।
देव देवी नंदी भृंगी संग बराती सजे हैं हजार।।
भूतों पिशाच भी नाच रहे छमछमाछम छम।
घूम घूम चूहे भी कहते बराती बनकर जाएं हम ।।
देखो तो यह अजब गजब हैं सारे बराती।
नाग ,बिच्छू, सिंह, बाघ ,संग, घोड़े हाथी ।।
जटाओं का मुकुट सजा है नाग की है माला ।
त्रिशुल हाथों में डमरू भी जंच रहा निराला ।।
भोलेनाथ की यह बारात नहीं है साधारण ।
वैराग्य तप और त्याग का है यह उदाहरण ।।
पार्वती सुंदर सजी हैं करके सोलह श्रृंगार ।
शंकर पहुंचे दूल्हा बनकर हिमवान के द्वार ।।
जमाई राजा को देख मैना हो गईं मूर्छित ।
भयानक सा बारात देख सभी हैं आश्चर्य चकित ।।
जय माला,वेद मंत्र से हुआ विवाह संपन्न ।
तप और गृहस्थ का अदभुत है यह मिलन ।।
शिवशक्ति एकत्व का जग के लिए प्रतीक है ।
वैराग्य और प्रेम का अदभुत मधुर संगीत हैं ।।
अंजना दिलीप दास
बसना छत्तीसगढ़











