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कविता

तूफान में दिये की लौ जलाके रखिए
फटे हुए मन रफू करके रखिए
सुन लो किसी की सिसकियाॅं तो
सिसकियों को गले लगाके रखिए

तितलियों से मशविरा करके रखिए
चिड़ियों की चहचहाहट सुनके रखिए
भौरों की तरह मंडराएं फूलों पर
दिल चुराने के पहले औकात देखके रखिए

नज़र से नज़र मिलाके रखिए
बात से बात बनाके रखिए
बात भी बात बना देता है कभी
सनम से सदा संपर्क साधके रखिए

मिला है विश्वास तो विश्वास सम्हाले रखिए
मिला है सिंहासन तो सिंहासन सम्हाले रखिए
बड़ी मुश्किल से जीता है हर किसी का दिल
दिल से दिल का रिश्ता सम्हाले रखिए

ज़माने से खुद को बचाके रखिए
होंसले से मंजिल को पाके रखिए
मंजिल का रस्ता मिलेगा खुद-बा-खुद
कांटों को फूलों से सज़ाके रखिए

जी एल जैन, जबलपुर

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