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नवरंग

उल्लास हैं, उमंग हैं और नव तरंग,
जीवन का यही सार जिसमे हो नवरंग l
ये लेकर फिर आई नई आस,
यही हैं जीवन के सफल होने की अभिलाषा ll

लो बसंत ऋतु आई है,
रंग बिरंगे फूल चारों ओर खिलाई है l
जीवन में हो सबके उल्लास,
गाओ सब मिलकर फाग ll

शीत हवाएं जब चलती,
सब मिलकर मधुर बाते करती l
दूर हुए गिले-शिकवे,
पास होते हम सबके रिश्ते ll

फूलों से खुशबू उड़ती,
महक उठी है धरती l
मधुकर को जो मिल गई,
मधुबन की सौगात ll

रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्य. विद्यालय बकोड़ी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी म. प्र.

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