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जीवन की सच्चाई समझो


जीवन की सच्चाई समझो

कहाँ कुँआ है खाई समझो ||

कोई अपना कौन पराया |
किसने किसका साथ निभाया ||
हर मुश्किल में खुलतीं आँखें |
मुखड़ा साफ नजर में आया ||
परिचय की गहराई समझो |
जीवन की सच्चाई समझो ||

जो लगते थे सबसे प्यारे |
रहे सदा आँखों के तारे ||
बुरे वक्त में बदली रंगत |
लगते हैं अब मन के कारे ||
इनकी ये चतुराई समझो |
जीवन की सच्चाई समझो ||

मुँह में राम बगल में छूरी |
जिनके जीवन की यह धूरी ||
बहुरुपिया है आज आदमी |
जिनकी फितरत बस दस्तूरी ||
उनकी यह कुटिलाई समझो |
जीवन की सच्चाई समझो ||

है गतिशील समय यह भाई |
आगे की गति समझ न आई ||
सच्चा सहज सरल हो जीवन |
संतों ने यह बात सुझाई ||
कर्मों की अच्छाई समझो |
जीवन की सच्चाई समझो ||

कभी किसी का हक मत छीनो |
समझो मत निर्धन को हीनो ||
सबका जीवन पतझड़ जैसा |
याद रखो यह सबक कुलीनो ||
कैसे करें भलाई समझो |
जीवन की सच्चाई समझो ||

बनो न कच्चे कभी कान के |
लेना निर्णय स्वयं जान के ||
तब ‘संतोष’ मिलेगा तुमको |
निकलोगे जब स्वयं ठान के ||
निंदा सदा बुराई समझो |
जीवन की सच्चाई समझो ||

कहाँ कुँआ है खाई समझो ||

संतोष नेमा संतोष

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