
आज के परिवेश में सबसे बड़ा और आदर्श युगल प्रेमी,
भगवान श्री राधे कृष्णा का स्वरूप है।
जो शरीर से नहीं आत्मीय प्रेम संबंध है।
भगवान श्री राधे कृष्णा प्रेम की पराकाष्ठा है।
जहां विरह है , परस्पर मिलन की आतुरता है,
अश्रु धारा है, और उनके जीवन में एकाकार होने की प्रबल आकांक्षा है।
आज के परिवेश में भगवान श्री राधे कृष्णा का प्रेम अनुकरणीय और प्रेरणास पद है।
सभी को जय श्री कृष्णा,,,
श्री राधे राधे,,,।।
राजेंद्र कुमार तिवारी
मंदसौर











