
विषय-गुलाम देश के आजाद नागरिक -मेरे चंद्रशेखर आजाद
विधा-काव्य
नमन तुमको है मेरे आजाद
गुलाम देश मे तुम थे आजाद
झुकना तुम्हारी फितरत मे ना था
गुलाम भारत की तामीर आपको कुबूल ना था
मूँछों पर ताव देकर युवा स्वाभिमान की एक अलख जगाई
आजाद जीना आजाद मरना ही युवा सीख बनाई
सांडर्श को मारा लालाजी की आत्मा को सुकून दिया
असेम्बली हाल मे फेंक बम अंग्रेजी हुकुमत को हिला दिया
चौड़ी छाती मे भारत माता की गुलामी का दर्द था
क्रान्ति का बिगुल बजाकर आर पार की लडाई का एकलौता फर्ज था
युवा उम्र मे तुमने स्वाभिमान से जीने का जज़्बा दिखाया था
गुलामी को उखाड़ फेंक आजाद भारत का स्वप्न जगाया था
भारत माँ के सच्चे सपूत आप मेरे आजाद थे
आजादी के संग्राम के कोहिनूर आप ही मेरे आजाद थे
शत शत नमन आपको अमर सेनानी मेरे आजाद है
आप थे सच्चे बलिदानी इसलिये भारत मेरा आजाद है
गुलाम देश के नागरिक आप आजाद थे
जिये ताजिंदगी आजाद शहीद हुए भी तो आजाद थे
स्वरचित एवं मौलिक
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र











