
जीत-हार में ज्यादा दूरी नहीं होती।
हर बार सब इच्छाएँ पूरी नहीं होती।।
राह में अधिक चाह नहीं रखनी चाहिए।
कर्मों की गति केवल परखनी चाहिए।।
धरातल पर रहते हुए नज़र ऊँची रखनी चाहिए।
पावन सृष्टि में केवल नेक दृष्टि रखनी चाहिए।।
कर्मों के दौर में मत हार-जीत की परवाह करो।
कठिन परिश्रम करने से कभी मत आप डरो।।
परोपकारी भावनाओं संग खुशियों से झोली भरो।
सद्भावना और शुद्ध विचार ही अंतर्मन में धरो।।
अपने आत्मबल के आधार पर डट कर खड़े रहो।।
न खुद घबराओ और न ही किसी को धमकाया करो।।
आँख दिखाने वालों के भी खूब काम आया करो।
एकसमान व्यवहार करते हुए आँखें बिछाया करो।।
माना कि संसार में बहुत-सी इच्छाएँ पूरी नहीं होती।
कमर कसने वालों की तकदीर कभी अधूरी नहीं होती।।
सकारात्मक बदलाव लाने वालों की सोच बुरी नहीं होती।
नज़दीकियांँ बढ़ाने वालों की किस्मत कभी बुरी नहीं होती।।
अंत में जीत-हार में ज्यादा दूरी नहीं होती।
रीत बदलने वालों की कोई मजबूरी नहीं होती।।
शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)











