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संस्कारों की पिचकारी”

आओ हम सभी इस होली में कुछ अनोखे रंगों से रंग लगाएं,
दिखावे के रंग से तन भले ही ना रंगे, परंतु इंद्रधनुषी रंग से सभी का मन रंग जाए।
थोड़ा हम भी स्नेह रंग में रंगे, बच्चों का जीवन समरसता के रंग से रंगीन बनाएं।
बच्चे होते हैं नाजुक से मिट्टी के ढले, इन्हें सुंदर स्वरूप संस्कारों के रंग से सजाएं।
एक मुट्ठी प्रेम रंग, दूसरी मुट्ठी करुणा, दया के रंग से,
समाज को निश्चल रंग से बौछार करायें, प्रेम और सौहार्द रंगों का संदेश फैलाएं।
लाल पीला, हरा नीला, गुलाबी है स्नेह रंग की छाया,
परिवार, समाज मेँ पड़े ना ईर्ष्या, जलस की काली छाया।
परिवार और समाज का मन हो श्रद्धा, विश्वास रंग से भरा,
बड़े बुजुर्गों का जीवन सतरंगी सा हो प्यारा
बढ़े प्रेम और एकता के रंग से भाईचारा ,
सदा बहे सभी के जीवन मेँ खुशियों के रंग की अविरल धारा |…

राजेश्वरी बाजपेई
जबलपुर म प्र

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