
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।।
मोय डार्लिंग-डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।
मोय डार्लिंग-डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।।
गेट खोलि घर में घुसि आयौ, रंग भरि कै पिचकारी लायौ।
मोय करि गयो रंग से निहाल रसिया होली में।।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।।
मोय डार्लिंग-डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।
मोय डार्लिंग-डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।।
मैं भागी बाने दौरि के पकड़ो।
आँखिनु आँखिनु हो गयो झगड़ो.
बाने बइयाँ दईं मरोड़ रसिया होली में।
आयो नन्दगाम से बू रसिया होली में।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।।
मैं इकली बाकी ग्वालन की टोली।
फंदो पड़ि गयो पहली थी होली।
मेरी करि दई चोली लाल रसिया होली में।।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में l
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।।
चाँदनी चौक से मैं लँहगा लाई।
साथ गए मेरे बलम और भाई।
करि गयो लँहगे को सत्यानाश रसिया होली में।।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।।
फिरि बानै मेरी छीनी चुनरिया।
लाल रंग की पहनी थी बढ़िया।
अपनी पीली उढ़नियाँ दै गयो मोय रसिया होली में।।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।।
मैं माखन पड़ोसिन से लै आई।
पकवान गुजिया घर ही बनाई।
बिना कुछ खाए बिलाय गयो रसिया होली में।।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।
आयो नन्द गाम से बू रसिया होली में।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।
मोय डार्लिंग डार्लिंग बोलि गयो रसिया होली में।।
डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी
‘ विद्या – सागर ‘
खुर्जा, बुलंदशहर ( उ. प्र.)












