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आज किसने उड़ायो ग़ुलाल

होली मिलन उत्सव में,
आज किसने उड़ायो ग़ुलाल,
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
आज किसने उड़ायो ग़ुलाल,
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।
आज वरिष्ठ नागरिक संस्था ने,
उड़ायो अबीर ग़ुलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
सभी पुरुषों ने, सभी माताओं ने,
सभी बच्चों ने, सभी कवियों ने,
और कवयित्रियों ने उड़ायो ग़ुलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
राधा जी ने उड़ायो ग़ुलाल,
कान्हा जी ने उड़ायो ग़ुलाल,
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
धरा पुलकित प्रकृति खुशहाल,
सृष्टि रची ब्रह्मा ने पूरी विशाल।
काहे करते हो फिर भी मलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
भवानी ने उड़ायो ग़ुलाल,
गणेश जी ने उड़ायो ग़ुलाल,
बृह्मा विष्णु ने उड़ायो ग़ुलाल,
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
भोले बाबा ने उड़ायो ग़ुलाल,
सभी देवों ने उड़ायो ग़ुलाल,
सभी देवियों ने उड़ायो ग़ुलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
तेंतीस कोटि देव देवियों ने,
होली मिलन में उड़ायो ग़ुलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
आज किसने उड़ायो ग़ुलाल,
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
सरस्वती ने उड़ायो ग़ुलाल,
गायत्री ने उड़ायो ग़ुलाल,
सावित्री ने उड़ायो ग़ुलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
लक्ष्मी जी ने उड़ायो ग़ुलाल,
गौरा जी ने उड़ायो ग़ुलाल,
यशोदा मैया ने उड़ायो ग़ुलाल।
नन्द बाबा ने उड़ायो ग़ुलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
श्रीराम ने उड़ायो ग़ुलाल,
सीता माता ने उड़ायो ग़ुलाल,
हनुमान ने उड़ायो ग़ुलाल।
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
होली मिलन उत्सव में,
आज किसने उड़ायो ग़ुलाल,
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।
आज वरिष्ठ नागरिक संस्था ने,
उड़ायो अबीर ग़ुलाल,
कि लाल हुई खुर्जा नगरी।।

डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी
‘ विद्या – सागर ‘
खुर्जा, बुलंदशहर ( उ. प्र.)

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