
मेरी प्रिय कविता ,
मेरे मन के तार तुम्हारे
तुम से ही तो जीवन का
सारा दूर हैं तनाव हमारे।।
जब भी अनुभव कुछ पाऊं
अपने शब्दों में उनको पिरोकर
मैं काव्य सृजन कर लेती हूं
हर लम्हें को अक्सर लिखती हूं ।।
लिख देती हूं तमाम ,मन की उलझने
जो सुलझ जाती ,कागज पर कलम से ,
अपने संवादों के साथ ,मै कविता रूप में
नित अपने शब्दों को प्रेम से संजोती हूं ।।
प्रीत प्रेम सी प्यारी, मुझको कविता
जीवन आनंद तुम ,मुझको देती हो
हर भाव संग ,लेखन मै रंग भरू जब
एक अनुभूति अलग ही तुम देती हो ।।
बन कर उभर आती हो कभी जीवनी
शब्दों के समूह से कही कहानी होती हो
मेरे मन के बगीचे में स्थापित ,दिव्य कमल
- कविता * तुम ही मेरी प्रिय ,सखी सी हो
प्रिय ” कविता ” साहित्य काव्य की बिटिया ।
©®आशी प्रतिभा
कविता दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं











