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नवदुर्गा लोकगीत

अम्बे गौरी पधारी हैं आज भवानी झूल रही,
झूल रही हाँ झूम रही… अम्बे गौरी पधारी…

प्रथम स्वरूप मइया शैलपुत्री आयीं,
सूर्य किरणों का रंग प्यारी,
हाथ त्रिशूल लिए आयीं, मइया झूल रही हैं…

द्वितीय स्वरूप मइया नाम अपर्णा पायीं,
त्याग तप की मूरत प्यारी,
पत्ता-पत्ता त्याग के आयीं, मइया झूल रही हैं…

तृतीय स्वरूप मइया चन्द्रघंटा आयीं,
मस्तक पे चंदा सोहे प्यारी,
घंटे की गूँज संग आयीं, मइया झूल रही हैं…

चतुर्थ स्वरूप मइया कुष्माण्डा आयीं,
अण्ड ब्रह्माण्ड रचने वाली प्यारी,
मधुर मुस्कान संग आयीं, मइया झूल रही हैं…

पंचम स्वरूप मइया स्कंदमाता आयीं,
गोदी में कार्तिकेय सोहें प्यारी,
वात्सल्य सुधा बरसाने आयीं, मइया झूल रही हैं…

षष्ठम स्वरूप मइया कात्यायनी आयीं,
कात्यायन की तपस्या फल पायीं,
सिंह वाहिनी रूप में आयीं, मइया झूल रही हैं…

सप्तम स्वरूप मइया शुभंकरी आयीं,
अंधकार मिटाने वाली प्यारी,
अभय वरदान देने आयीं, मइया झूल रही हैं…

अष्टम स्वरूप मइया महागौरी आयीं,
गौर वर्ण की आभा प्यारी,
शिव की शक्ति संग आयीं, मइया झूल रही हैं…

नवम स्वरूप मइया सिद्धिदात्री आयीं,
अष्ट सिद्धियों की दाता प्यारी,
मनोकामना पूर्ण करने आयीं, मइया झूल रही हैं…

रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश

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