
हे मनुज! हर बार स्नेह रखा कीजिए बरकरार।
प्रत्येक कार्य को करने हेतु कीजिए स्वीकार।।
हर किसी की प्रगति में आप स्वयं सहायता कीजिए।
बेशुमार दुआओं के साथ मानवीय व्यवहार कीजिए।।
यदि प्रशंसा कर सकते हो तो हर बार किया कीजिए।
खिले हुए हर चेहरे की रौनक आप बन जाया कीजिए।।
पवित्र और पक्का हृदय बनाने की आवश्यकता है।
अनेक सुधार करते हुए प्रगति पाने की आवश्यकता है।
दूसरों की भलाई हेतु हाथ बँटाने की आवश्यकता है।
खामोशी से खूबसूरत कठिन परिश्रम की आवश्यकता है।।
हे मेहनती! धरा पर रहते हुए ज़रा गगन को स्पर्श कीजिए।
किसी को समझ आए या न आए फिर भी स्पष्ट कीजिए।।
लगन और निष्ठावान के साथ खुद को समर्पित कीजिए।
अपने चित्त को हर बार हित करने हेतु प्रेरित कीजिए।।
असहाय व दुखी लोगों की हर क्षण सहायता कीजिए।
आज की पीढ़ी में ऐसे रोल मॉडल तैयार कीजिए।।
अपनी कथनी और करनी बस एक दिखाया कीजिए।
गलती से भी कोई गलती न हो,बुद्धि को खबरदार कीजिए।।
अंत में सभी के प्रति स्नेह रखा कीजिए बरकरार।
भारत देश में चारों ओर होनी चाहिए खुशियाँ अपार।।
कवयित्री-डॉ० ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)













