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श्री हरि विष्णु के दशावतार

धर्म की रक्षा हेतु बने विष्णु आधार,
पृथ्वी पर धर्म स्थापित करने लिए दशावतार।

प्रलय जब आया पृथ्वी पर, लिया मत्स्य का रूप,
मनु और वेदों की रक्षा की, धर्म के अनुरूप।

कच्छप रूप धारण कर मंदराचल को संभाला,
समुद्र मंथन का आधार बन, सागर को खंगाला।

जब पृथ्वी पर आया संकट, छिपी थी पाताल में,
हिरण्याक्ष से रक्षा की, लेकर वराह अवतार में।

भक्त प्रह्लाद की रक्षा को प्रकटे नरसिंह भगवान,
हिरण्यकश्यप का नाश किया, सुन भक्त का आव्हान।

देवों के उद्धार हेतु लिया वामन का वेश,
तीनों लोक नाप लिए तीन पग में, बचा न कुछ शेष।

परशुराम अवतरित हुए, धर्म पताका लहराने,
अत्याचारी क्षत्रियों का नाश किया, जग को बचाने।

मर्यादा के प्रतीक बन जन्मे पुरुषोत्तम राम,
राम नाम में शक्ति अपार, होता जग का कल्याण।

कंस का वध करने आए कृष्ण सुदर्शन चक्रधारी,
गीता में धर्म उपदेश दिया, जय हो कृष्ण मुरारी।

सत्य-अहिंसा का संदेश लेकर आए बुद्ध भगवान,
करुणा के सागर बनकर किए जग का कल्याण।

घोड़े पर सवार होकर आएंगे कल्कि अवतार,
कलयुग में अधर्म मिटाकर करेंगे धर्म का सदा ही विस्तार।

श्रीमती अंजना दिलीप दास
बसना छत्तीसगढ़

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