
मेरी यादों के झरोखों में छुप कर,
वो आता है, मुस्काता है, चला जाता है।
रेत पर बैठ कर मेरी, सागर के किनारे कोई,
तशवीर बनाता है, मिटाता है, चला जाता है।
चुन कर गुलशन से, खिले फूलों की कलियाँ,,
मुझको बुलाता है,सजाता है चला जाता है।
जहां सजी फलक पर,. सितारों की महफ़िल,,
चाँद हंसता है,हंसाता है, चला जाता है।
सबके किरदार अलग,नाटक ‘ मलय’ दुनिया दारी,,
कोई परदा गिराता है,रुलाता है, चला जाता है।
डाक्टर मलय तिवारी
बदलापुर जौनपुर













