
विषय-मजदूर की आवाज
कभी धूप तो कभी छांव है,
मजदूर समाज कि नाव है,
कब होगा उसका राज,
सुनो अब मजदूर कि आवाज।
मजदूर समाज कि रीढ़ है,
विकाश की उज्ज्वल दीप है,
चट्टानों को तोड़कर,
नया महल बनाता है।
दिन रात परिश्रम कर,
खेतों में फसल उगाता हैं,
रोजी रोटी कमाकर,
परिवार का पोषण करता है।
कार्य स्थल जैसे भी मिले,
वो नहीं कभी थकता है,
धैर्य और साहस से,
हर कार्य पुर्ण करता है।
मजदूरों की अधिकारों का
सम्मान करो,
समानता का अधिकार करो,
मजदूरों की मेहनत बिना
समाज कि प्रगति असंभव है,
आओ हम सम्मान दें,
मजदूरों की आवाज सुने।
नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ़













