
उदय होते ह्रदय में जब, कल्पनाओं के वो मेले हैं।
बहुत कुछ कष्ट देखे हैं, बहुत हमने भी हैं झेले हैं।
वही कल्पनाएँ तो तुझको, उम्मीदों के पंख देती हैं।
भविष्य के सारे सपनो को, जीवंत वो कर देती हैं।
उमर है ये बहुत छोटी पर, सपनों में सच्चाई है।
खुली आँखों से देखो तुम, भविष्य की वो परछाई है।
सुनाई देती है कानों में, मानो बजती शहनाई हैं।
तेरा हर सपना सच्चा है, अगर सपनों में सच्चाई है।
उदय होते ह्रदय में जब, कल्पनाओं के वो मेले हैं।
बहुत कुछ कष्ट देखे हैं, बहुत हमने भी झेले हैं।
कल्पनाओं बिना जीवन ,मानो मिट्टी का ढेला है।
कष्टों की बारिश होते ही, बह जाता बनकर रेला है।
कल्पनाओं में यदि तुमने, सत्य धर्म की छवि पाई है।
हकीकत बनकर आयेगी, कल्पनाओं की गहराई है।
कल्पनाएँ वही हकीकत हैं, अगर तुम प्रेम बोते हो।
दिन में मेहनत करते हो, रातों को सुकूँ से सोते हो।
जीवन में हकीकत में, बहुत कुछ कष्ट आते हैं।
जिंदगी को जो समझते हैं, हँसकर सब सह जाते हैं।
कल्पना और हकीकत तो, आपस में दो सहेली हैं।
बिना संघर्ष जीवन में, लगते कहाँ वो मेले हैं।
बहुत कुछ कष्ट देखे हैं, बहुत हमने भी झेले हैं।
उदय होते ह्रदय में जब, कल्पनाओं के वो मेले हैं।
रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)













