
इक सवाल का ज़वाब उलझा कुछ इस क़दर है
राहें हमारी एक हैं पर मंजिल किस तरफ़ है ll
जुदा हम एक दूजे से हो जाएं ये मुमकिन नहीं
मजबूत इरादों का हमारे, रुख एक तरफ़ है ll
चाहतों का जुनून ही तो हमारी मंजिल है
मगर एक बेकरारी,कोई मजबूरी हर तरफ़ है ll
एक दूसरे के खयालों में ही तो बसे रहते हैं हम
फिर क्यों ये सवाल सताता हम को हर तरफ़ है ll
दिल की राहों पर जो चल पड़े हैं हम
मंजिल का पता लापता हर तरफ़ है ll
आओ कुछ इस कदर मिल जाएं हम तुम
कि कहानी बने एक यादगार, यूँ शोर हर तरफ़ है ll
और भला हम क्या करते बता दे ये जमाना
घुट घुट कर जीना तो जीने के नाम पर गुनाह हर तरफ़ है ll
मीना रावलानी
कोटा राजस्थान













