
मिठास तेरी मोहब्बत की जैसे आइसक्रीम में चीनी समा जाती है,
रंग तेरी मोहब्बत का जैसे आइसक्रीम में केसर निखर जाता है।।
मुस्कान तेरी जैसे आइसक्रीम पर पिस्ते की वो बारीक कतरन,
बातों में तेरी चाशनी जैसे आइसक्रीम का वो पिघला सा मन।।
साथ तेरा जैसे तपती धूप में ठंडी आइसक्रीम का सुकून,
चाहत तेरी जैसे हर फ्लेवर में भरा एक ही गहरा जुनून।।
तौबा! ये तेरा शरमाना जैसे आइसक्रीम पर जमी बर्फ की परत,
पिघल जाने को जी चाहत है पाकर तेरी मोहब्बत की सोहबत।।
रूह में मेरी तू घुलती गई जैसे वनीला में स्ट्रॉबेरी का साथ,
थामे रखना उम्र भर बस ऐसे ही आइसक्रीम सा मेरा हाथ।।
तू है तो हर मौसम में भी आइसक्रीम जैसा जश्न रहता है,
ये दिल बस अब तेरी ही मोहब्बत के मीठे सांचे में ढलता है।।
लफ्ज़ मेरे अब ठंडक पा गए हैं पाकर तेरा हसीं साया,
आइसक्रीम की इस मिठास ने ही तो सारा प्यार जताया।।
खत्म हो ये गज़ल मगर प्यार रहे जैसे आइसक्रीम का जायका,
बस रह जाए लबों पे ज़िक्र और ये अंदाज़ गुनगुनाने का।।
रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश










