
उपनिषद,,
ब्रह्म सूत्रम ।।
अहम् ब्रह्मास्मि,,,
ऐकोहम द्वितीयो नास्ति।।
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मैं हूं ब्रह्म तत्व ,अविनाशी,
मैं हूं ब्रह्म तत्व से ,जन्मा
मुझे जाना है ,उसी में मिलना ।
मैं हूं जन्म मरण से छूटा,
ना मैं जन्मा, ना में मरता
मैं हूं अजर अमर अविनाशी,,,।।
मैं ना स्त्री ,ना हूं पुरुष मैं हूं मैं हूं सद् चिद रूप आनंद।
मैं ही हूं रूप निराकार और साकार,,,।।
सब ही है मुझ में और मैं ही हूं सभी मैं,,
मैं हूं एक और में ही रूप अनेक,,,
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश












