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माँ : ईश्वर का अलौकिक रूप

सूर्य सा उज्ज्वल रूप होती है मेरी माँ,
ममता की सजीव मूरत होती है मेरी माँ।
जिसके आँचल में हर दुख खो जाता है,
वो प्रेम और त्याग की सूरत होती है माँ॥

माँ की दुआओं में अपार शक्ति बसती है,
उसकी मुस्कान में पूरी दुनिया हँसती है।
अपने बच्चों की खुशी में हर दर्द सह जाए,
ईश्वर की सबसे सुंदर रचना होती है माँ॥

माँ केवल एक शब्द नहीं, स्वरूप है,
पूरे जीवन का आधार सा रूप है माँ।
अंधेरों में दीपक बन राह दिखाती है माँ,
हर मुश्किल में मजबूत दीवार होती है माँ॥

उसके कदमों में जन्नत का एहसास मिलता है,
उसके प्रेम में हमेशा सच्चा विश्वास मिलता है।
जीवन की हर रोशनी जिसकी बदौलत होती है,
सच में भगवान का दूसरा अलौकिक रूप है माँ॥

रूपेश कुमार
चैनपुर, सीवान, बिहार

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