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परिवार जीवन की पाठशाला,

परिवार जीवन की पाठशाला,
जहाँ मिलते अनगिन ज्ञान,
छोटे-छोटे कदमों से ही,
बनता है जीवन महान।

माँ सिखलाती प्रेम और ममता,
पिता संघर्षों का सार,
भाई-बहन के संग में मिलता,
हँसी-खुशी का संसार।

गिरकर फिर से उठना सीखें,
सपनों को आकार मिले,
अपनेपन की मीठी छाया में,
जीवन को संस्कार मिले।

छोटी बातों में छिपे हुए,
अनुभव के गहरे सबक,
धीरे-धीरे बड़े होते हम,
समझें जीवन की चमक।

जब दुनिया राह भटकाए,
परिवार दिशा दिखाता है,
हर मुश्किल की काली रात में,
उम्मीद दीप जलाता है।

धन-दौलत से बढ़कर होता,
अपनों का सच्चा प्यार,
परिवार ही पहली शिक्षा,
परिवार ही जीवन का सार।

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

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