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आठ महान सूक्तियाँ

पैदा हुये गरीब हम, आदित्य
ग़लती नहीं हमारी।
मर जायें यदि गरीब हम यह
गलती होगी हमारी॥

महान व्यक्तित्व के साथ जन्म लेना
आदित्य यह संयोग हो सकता है।
परंतु महान व्यक्ति बनकर मरना
बहुत बड़ा यश मिल सकता है॥

आदित्य कोई बात नहीं यदि
जन्म सामान्य हुआ हो मेरा।
मृत्यु के बाद इतिहास में नाम
आये यह बड़ा सौभाग्य है मेरा॥

जीवन में किसी का अनुसरण
करना तो आवश्यक नहीं है।
आदित्य हर किसी से कुछ न
कुछ सीखना आवश्यक है॥

आदित्य मेहनत हमें एक शैतान
की तरह ख़ूब करनी चाहिए।
पर पुण्य कार्य सभी हमें देवदूत
की तरह ही करने चाहिये ॥

आदित्य ‘करो या मरो’ का नारा
तो अब बहुत पुराना हो गया है।
मरने से पहले काम तमाम करना
फिर मरना ही आज का नारा है॥

मूड खराब हो तो कठोर वचनों
पर सदा नियंत्रण रखा जाता है।
आदित्य कहे गए शब्द बदलने
के लिए अवसर नहीं मिलता है॥

आदित्य नापसंद किसी को नहीं,
परन्तु पसंद हम सब को करें।
लेकिन प्यारे भाईयो विश्वास के
योग्य है जो विश्वास उसी पर करें॥

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र,
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

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