
वर दो माँ, वर दो माँ, वर दो माँ,
वीणा पाणिनि वर दो माँ॥
तन मन का तम दूर करो माँ,
भव बंधन मोह सूत्र मिटाओ माँ,
तन मन का मैल मिटा दो माँ,
जीवन का कलुष हटा दो माँ।
वर दो माँ, वर दो माँ, वर दो माँ,
वीणा पाणिनि वर दो माँ ॥
मन मस्तिष्क निर्मल कर दो माँ,
साहस शील हृदय में भर दो,
जीवन त्याग तपोमय कर दो,
संयम, सत्य, स्नेह का वर दो।
वर दो माँ, वर दो माँ, वर दो माँ,
वीणा पाणिनि वर दो माँ ॥
मानस का अज्ञान तिमिर,
जग में फैला व्यापक अंधकार,
ज्ञान कपाट कमल खिल कर,
मन-मंदिर-घर प्रकाश से भर दो।
वर दो माँ, वर दो माँ, वर दो माँ,
वीणा पाणिनि वर दो माँ ॥
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र,
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’,लखनऊ












