
जिंदगी की गणित में उलझन प्रतिपल
हल कर लो सरल वरना है यह गरल
जिंदगी की कठिनता का ना कोई हल,
यह बहुत शांत है और बहुत चंचल।।
सत्य का सहारा लो बन जाएगा संबल,
झूठ की डगर पर हर कदम है विकल।
कर्म को सजाकर रखो सदा निष्कल,
मंजिल भी मिलेगी और होगा सफल।।
धैर्य को बना लो जीवन का सम्बल,
क्रोध की अगन करे मानव को विकल।
प्रेम का दीपक रखो हृदय में अविरल,
हर अंधियारा होगा फिर पल में विफल।।
समय की धारा बहती रहती अविकल,
रुकना यदि चाहोगे हो जाओगे निर्बल।
हंसकर हर पीड़ा को करना तुम सरल,
जिंदगी की गणित सुलझेगी प्रतिपल।।
©® पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश












