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गीत

चंदा निकल जरा बादल से।
मीत इधर आएगा चल के।।
पागल मनवा राह देखे,
आंख से अश्रु धारा छल के..

पथ पथरिला घोर अंधेरा।
दूर बहुत है मोर सवेरा।।
लाज शर्म का चलन अनोखा,
जग से भी रहना संभल के..

नई नई मुलाकात हुई हैं।
थोड़ी बहुत बात हुई है।।
जीवन के नव सपन बुनेंगे,
प्रीतम जाएं ना पलट के..

तेरे जैसा मुखड़ा उनका।
शीतल स्वभाव गहना उनका।।
बिन देखे अब चैन न आए,
मनहर सुख मिले यहां मिल के..

गीतकार मनोहर सिंह चौहान मधुकर

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