
कान्हा तेरे नैनो की भाषा,
मन वीणा के तार छेड़े।
एक नज़र जो प्रेम से देखो ,
पत्थर दिल भी पिघल जाए।
तेरी चितवन में ऐसी माया,
जिसे देखकर जग मुस्काए।
तेरी आँखों का एक इशारा,
सुने मन में प्रेम जगाए।
तेरी आँखों की उस भाषा में,
अनिता का विश्वास बसा।
प्रेम भक्ति और बिरह मिलाकर,
एक अनोखा प्रेम एहसास बसा।
कान्हा तेरी आँखों की भाषा,
मन को हर पल समझाती है।
बिन बोले ही प्रेम का सागर,
हृदय में धीरे से बह जाती है।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़












