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पवित्रता

मेरे किताब के पन्नों में
छपा है प्यार का गीत,
गीतों में लिखा है मैंने
अपना पवित्र प्रीत।
न कोई शहनाई
और न ही कोई ढोल,
मेरे गीतों में बस है
प्यार के दो बोल।
तेरी बातें मैंने किसी से
कही नहीं आज तक,
बस मेरा दिल उन्हें याद
करके करता है धक धक।
तेरी शान में सिर्फ चंद
बातें मैंने लिखी है,
तुझे जब भी देखा चेहरे में
तेरे हंसी ही दिखी है।

कवि संगम त्रिपाठी
जबलपुर मध्यप्रदेश

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