
अगर बटे तो मिट जाओगे,
बात ये मेरी मान लो!
बचाना है तो मिलकर रहना,
सच्चाई ये जान लो!!
बल है बहुत एकता में ये,
ज्ञानी ध्यानी कहते थे!
सोने की चिड़िया था भारत,
मिल-जुलकर जब रहते थे!!
अगर हुए हम एक नही तो,
देश पुन: बंट जाएगा!
आने वाला समय हमें,
फिर माफ नहीं कर पाएगा!!
मानवता है धर्म हमारा,
प्रेम दिया है सबको!
अगर किसी ने छेड़ा हमको,
छोड़ेंगे ना उसको!!
सर्व धर्म समभाव सहृदयता,
लगता हमको प्यारा!
मिल-जुलकर के रहें सदा सब,
और समाज हो न्यारा!!
रहे सनातन धर्म की यूँ हीं,
बहती अविरल धारा!
हम नहीं बटेंगे एक रहेेंगे,
हो संकल्प हमारा!!
‘जिज्ञासु’ जन आओ मिलकर,
एक अभियान चलाएं!
भेदभाव को मिटा सभी के,
एकजुट हम हो जाएं!!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’












