
मैंने चोला श्रीराम का पहना,
राह बड़ी बलिदान की।
जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की, जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की जय बोलो।।
गायत्री मंत्र को जन-जन ने जाना,
जो न माने कभी, उनने भी माना।
युगतीर्थ को नमन करो जी,
शांतिकुंज गुरुधाम की।
जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की, जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की जय बोलो।।
माँ भगवती हैं संग विराजें,
खुशी में हम सब झूमे-नाचें।
डफली और मृदंग बजाकर,
गुणगान करो अंग बाम की।
जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की, जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की जय बोलो।।
महाकाल गुरुदेव हमारे,
जिनके सिर पर चंद्र सुहावे।
घर-घर जप-यज्ञ परंपरा देकर,
रक्षा करते सकल जहान की।
जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की, जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की जय बोलो।।
ज्ञान-ज्योति हर मन में जलती,
अंधियारी हर राह निकलती।
संदेश सुनाओ प्रेम-धर्म का,
बात करो कल्याण की।
जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की, जय बोलो,
जय बोलो श्रीराम की जय बोलो।।
रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड













